DIL KI KALAM SE

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जीने का आधार -प्रेम

Posted On: 30 Oct, 2012 Others में

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सबका अस्तिव और अहसास
हृदय में जगाता
श्रद्धा, आशा और विश्वास
मीठे स्वर का पान कर
स्वर्ग ले आता भू धरा पर

बिना शर्त के बिना नियम के
संचालित कर हर डगर को
सुब्द्ता से मुक्त कर
मार्ग देता सुगम बना
अंतर्मनो को जोड़ने का
प्रेम करता है प्रयास

मित्र को शत्रु, शत्रु को मित्र
गैर को अपना, अपने को गैर
फूल माला सी डोर बना
राग, द्वेष और ईर्ष्या से
हमको देता प्रेम छुड़ा

हर क्षेम से मुक्ति दे
शांति का दे पाठ पढ़ा
निश्छल प्रेम से हमे मिला
मोक्ष का देता मार्ग दिखा
हर मर्ज की दवा बन
जीना हमको दे सिखा

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
November 3, 2012

aadarniy singh sahab, sadar abhivadan bahut sundar bhav ki rachna, badhai

    phoolsingh के द्वारा
    November 3, 2012

    प्रदीप जी नमस्कार…….. आपका बहुत बहुत धन्यवाद . फूल सिंह

yogi sarswat के द्वारा
November 2, 2012

सुब्द्ता से मुक्त कर मार्ग देता सुगम बना अंतर्मनो को जोड़ने का प्रेम करता है प्रयास मित्र को शत्रु, शत्रु को मित्र गैर को अपना, अपने को गैर फूल माला सी डोर बना राग, द्वेष और ईर्ष्या से हमको देता प्रेम छुड़ा हर क्षेम से मुक्ति दे प्रेम में बड़ी शक्ति होती है , सही कहा आपने श्री फूल सिंह जी ! सुन्दर अभिव्यक्ति

    phoolsingh के द्वारा
    November 3, 2012

    योगी जी प्रणाम……. सर आप ऐसे ही सदा मेरा मार्गदर्शन करते रहे…………….सुक्रिया फूल सिंह

yatindranathchaturvedi के द्वारा
November 1, 2012

उम्दा

    phoolsingh के द्वारा
    November 3, 2012

    यतीन्द्र जी प्रणाम….. आपका बहुत बहुत सुक्रिया फूल सिंह

vikramjitsingh के द्वारा
November 1, 2012

आज तो बस नमस्कार करने ही आ सके हैं…… सादर फूल सिंह जी…..

    phoolsingh के द्वारा
    November 3, 2012

    विक्रम जी प्रणाम….. आपका बहुत बहुत सुक्रिया फूल सिंह

अजय यादव के द्वारा
November 1, 2012

फूल सिंह सर जी,सादर अभिवादन | इस सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड में रचियता ने हर वस्तु के आधार में प्रेम का सृजन किया और प्रेम के नियम [law of attraction] को ब्रम्हांड का सर्वश्रेठ क्रियाकारी नियम बनाया | हर कोई प्रेम के इन नियमों के आधीन हैं |जिस दिन वह प्रेम से मुक्त हों गया उस दिन वह जीवन से भी मुक्त हों ही जाता हैं | ऐसी ही एक रचना पढ़िए- http://avchetnmn.jagranjunction.com/2012/10/31/%E0%A4%89%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AB%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A5%82%E0%A4%81-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80/

    phoolsingh के द्वारा
    November 3, 2012

    अजय जी प्रणाम….. आपका बहुत बहुत सुक्रिया फूल सिंह

deepaksharmakuluvi के द्वारा
November 1, 2012

सुन्दर रचना

rekhafbd के द्वारा
November 1, 2012

आदरणीय फूल सिंह जी निश्छल प्रेम से हमे मिला मोक्ष का देता मार्ग दिखा हर मर्ज की दवा बन जीना हमको दे सिखा,अति सुंदर अभिव्यक्ति ,बधाई

    phoolsingh के द्वारा
    November 3, 2012

    रेखा जी प्रणाम…….. आपका बहुत बहुत आभार…….. फूल सिंह

akraktale के द्वारा
October 31, 2012

फूलसिंह जी                 सादर, प्रेम तो रिश्तों को जोडने कि वह गोंद है जो कमजोर हो तो दुनिया ही बिखर जाए. सुन्दर प्रेम के महत्त्व को दर्शाती रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें.

    phoolsingh के द्वारा
    November 3, 2012

    अशोक जी प्रणाम……. सर आप ऐसे ही सदा मेरा मार्गदर्शन करते रहे…………….सुक्रिया फूल सिंह

October 31, 2012

फूल सिंह जी बहुत ही अच्छी प्रस्तुति के लिए आभार ,

    phoolsingh के द्वारा
    November 3, 2012

    शर्मा जी नमस्कार…….. आपका बहुत बहुत सुक्रिया ……………… फूल सिंह

Santlal Karun के द्वारा
October 30, 2012

अंतर्मनो को जोड़ने का “प्रेम करता है प्रयास मित्र को शत्रु, शत्रु को मित्र गैर को अपना, अपने को गैर फूल माला सी डोर बना राग, द्वेष और ईर्ष्या से हमको देता प्रेम छुड़ा” अच्छी कविता; साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !


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